मध्यवर्गीय भारतीयों के दर्द पर सुप्रीम कोर्ट की संवेदनशील टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने यह कहा है कि “आवास का अधिकार जीवन के मौलिक अधिकार का हिस्सा है”, और यह संदेश देते हुए कि घर केवल अमीरों या गरीबों की समस्या नहीं है, बल्कि मध्यवर्गीय परिवारों के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन चुका है। अदालत ने विशेष रूप से यह बताया कि बढ़ती रियल एस्टेट कीमतें, कड़ी ऋण शर्तें (loan terms), और सरकारी योजनाओं की सीमित पहुंच ने मध्यवर्गीय लोगों के लिए घर हासिल करना मुश्किल बना दिया है।
‘राइट टू हाउसिंग’ अब ‘राइट टू लाइफ’ से जुड़ा
अनुच्छेद 21 के अनुसार जीवन का अधिकार सिर्फ जीवित रहने का नहीं है, बल्कि सम्मान और सुरक्षा के साथ जीवन जीने का भी है। सुप्रीम कोर्ट ने इस दृष्टि से कहा कि आवास की समस्या को भी संवैधानिक दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।
आँकड़े और उदाहरण: कीमत, ऋण दरें और बाजार प्रवृत्तियाँ
| विषय | आँकड़ा / उदाहरण | स्रोत |
|---|---|---|
| विविध बैंकों की गृह-ऋण ब्याज दरें (Home Loan Interest Rates) | कई बैंकों में गृह-ऋण दरें लगभग 7.35% वार्षिक से शुरू होती हैं। उदाहरण के लिए, Bank of Maharashtra में 7.35% p.a. की दरें मिलती हैं। | बैंक ऑफ महाराष्ट्र होम लोन विवरण |
| Bajaj Finserv में वेतनभोगी ग्राहक (salaried) गृह-ऋण दर 7.45% p.a. से शुरू होती है। | ||
| HDFC बैंक में गृह-ऋण ब्याज दरें ~ 7.90% p.a. से शुरू होती हैं। | ||
| SBI (State Bank of India) में होम लोन की ब्याज दरें न्यूनतम ~ 7.50% p.a. से शुरू होती हैं। | ||
| मूल्य वृद्धि (Real Estate Price Trends) | 2019-2024 के बीच भारत में 30 वर्ग मीटर से कम क्षेत्र के घरों की लॉन्च मूल्य दर लगभग 8% प्रति वर्ष की दर से बढ़ी है—यह वृद्धि मध्यम आकार के घरों की कीमतें बढ़ने की गति से लगभग दोगुनी है। | |
| “मिड-सेगमेंट” आवास (₹50 लाख से ₹1 करोड़ तक) बाजार का लगभग 48% हिस्सेदारी ले रहा है और इसे 2025 में लगभग 12% की वृद्धि हुई है। | ||
| “ओल्ड-अफ़ोर्डेबल” आवास (₹50 लाख से कम) की आपूर्ति में गिरावट देखी गई है; यह सेगमेंट अब कुल बाजार का केवल 24-32% रह गया है। | ||
| नीति और योजनाएँ | प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत “आवास के लिए सभी” की पहल की गई थी। | |
| “Affordable housing” सेगमेंट को बढ़ावा मिला है: ब्याज दरों में कुछ छूट, सब्सिडी, और सरकारी प्रोत्साहन मौजूद हैं। |
मध्यवर्ग के सामने चुनौतियाँ
- आय बनाम लागत में असंतुलन: जहां रियल एस्टेट की कीमतें या लॉन्च प्राइस तेज़ी से बढ़ रही हैं, वहीं आम मध्यम वर्गीय व्यक्तियों की आय इतनी तेजी से नहीं बढ़ रही। इस असंतुलन के कारण घर लेना कठिन होता जा रहा है।
- ऋण भुगतान के दबाव: उदाहरण के लिए, यदि कोई ₹50 लाख का होम लोन लेता है (मान कर ब्याज दर ~7.35-8%), 15-20 साल की अवधि में EMI भारी हो जाती है जो मासिक आय में बड़ा हिस्सा लेती है।
- आश्रितता सरकारी प्रोत्साहन और योजनाओं पर: बीते कुछ वर्षों में PMAY जैसी योजनाएँ शुरू हुईं लेकिन इनके कार्यान्वयन, पात्रता श्रेणियों, जमीन की उपलब्धता और स्थानीय नियोजन बाधाओं के कारण हर मध्यवर्गीय तक पहुँच पाना संभव नहीं हो पाया है।
सरकार और नीति-निर्माताओं के लिए सुझाव
- और सस्ते ऋण विकल्प — ब्याज दरों को और घटाने के उपाय, या मध्यम-वर्ग के लिए विशेष पैकेज।
- सब्सिडी और कर लाभों का सहज उपयोग — अस्पताल-नियमित योजनाएँ, आवेदन प्रक्रिया सरल हों, दस्तावेज़ीकरण कम हो।
- मध्यम-सेगमेंट और अफोर्डेबल सेगमेंट में आपूर्ति बढ़ाने की पहल — डेवलपर्स को प्रोत्साहन, जमीन की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
- शहरों के बाहरी इलाकों में आवास योजनाएँ — जहाँ ज़मीन सस्ती हो लेकिन सेवाएँ (सड़क, पानी, बिजली, परिवहन) अच्छी हों।
उम्मीद की किरण
सुप्रीम कोर्ट का बयान सिर्फ़ न्यायिक दृष्टिकोण नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक चेतावनी है कि यदि सरकार और नीति निर्माता इस समस्या को गंभीरता से नहीं लेंगे तो “घर” का सपना मध्यवर्ग के लिए और भी दूर हो जाएगा। लेकिन इस डेटा से यह स्पष्ट है कि कई योजनाएँ और नीतियाँ इस दिशा में काम कर रही हैं, और यदि बेहतरीन सुधार हो, तो मध्यवर्गीय व्यक्ति के लिए घर मुमकिन हो सकता है।
